
प्राची तेज़ी से आगे बढ़ती है और बिना कुछ सोचे... अपने होठों को विहान के होठों से टकरा देती है। वक़्त जैसे ठहर सा जाता है। विहान पूरी तरह स्टेच्यू बन जाता है – उसका हाथ हवा में अटका हुआ, आँखें खुली की खुली। इस सन्नाटे में, बूढ़ा बिज़नेसमैन मौका देखकर वहाँ से खिसक लेता है। इधर… प्राची के होठ अब भी विहान के होठों को छू रहे होते हैं।
कुछ पल बाद… विहान की आँखें जैसे ही बंद होती हैं, उसका ग़ुस्सा अब एक और ही शक्ल ले लेता है।वो प्राची की कमर को कसकर थाम लेता है, जैसे कह रहा हो — "You are only mine"


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