
प्राची सुनीता आंटी की टूटी हुई चूड़ी को हाथ में पकड़े डर और उलझन के बीच खड़ी थी। उसकी आँखें उस चूड़ी पर जमी थीं जैसे उसमें कोई राज़ छुपा हो। अचानक, उसके कंधे पर किसी का हाथ रखा जाता है।
वो एक झटके से पीछे मुड़ती है, उसका चेहरा डर और घबराहट से सफेद पड़ चुका था। "अरे! रिलैक्स यार, मैं ही हूँ!" — महिरा की आवाज़ सुनकर प्राची ने थोड़ी राहत की सांस ली। "क्या हुआ प्राची? तूने तो पार्क बुलाया था, यहाँ जले हुए घर के पास क्या कर रही है? और आज अचानक इतने दिनों बाद तूने मुझे याद किया सब ठीक है?"


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