
वो अब सिर्फ़ गुस्से में नहीं था... वो बर्बादी के कगार पर खड़ा एक तूफ़ान था। विहान के हाथ में वो गुंडे का फोन था — आँखों में खून, साँसें जलती हुई, और दिल में एक ही नाम — "Prachi."
विहान (दाँत भींचकर, बुदबुदाते हुए): "किसी ने सोचा भी कैसे कि मेरी बीवी को छू सकता है... मेरी दुनिया को मुझसे छीन सकता है?"वो मेंशन के अंदर आता है, दिवार पर मुक्का मारता है।


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